Sep 8, 2011

एक सपना सजा है

मंजिल की राह में,
दरख़्त की छाँव में,
सपनों के गाँव में, 
गाँव के खलिहानों में, 
धरती की गोद में, 
नव-जातों की सिराओं में,

सिराओं से लहराती बसंती हवा में,
हवाओं के आँचल में छुपी सुरभि में,

एक सपना सजा है,
जो हरेक का अपना है,
जो अपनों से जुड़ा है,
अपनों की चाह में,

जहां आशाओं के बीज बोए जाते हैं,
अरमानो और प्रार्थनाओ से सींचे जाते हैं 

जब प्यार के आँचल की छाँव तले,
अपने ही उन्माद में अंकुर फूटते हैं,

तो उन्हें देख ख़ुशी के नयनो में,
सपने संजोने वाला जल मोती बन,
अपनी पूर्णता को प्राप्त करता है

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